राजस्थान में सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे के बाद अब ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Beawar-Bharatpur Greenfield Expressway) का काम सुर्खियों में है। यह एक्सप्रेसवे न केवल पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर/अजमेर) को पूर्वी राजस्थान (भरतपुर/ब्रज क्षेत्र) से जोड़ेगा, बल्कि जयपुर शहर के ट्रैफिक को भी बायपास करने में मदद करेगा।
क्या है प्रोजेक्ट और रूट?
NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) द्वारा प्रस्तावित यह एक्सप्रेसवे एक 4-लेन (6-लेन तक विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है। इसका मतलब है कि यह मौजूदा सड़क को चौड़ा करके नहीं, बल्कि खेतों और खाली जमीनों से होकर एक बिल्कुल नई सड़क के रूप में बनाया जा रहा है।
- शुरुआत: यह एक्सप्रेसवे अजमेर जिले के ब्यावर से शुरू होगा।
- मध्य पड़ाव: यह एक्सप्रेसवे जयपुर जिले के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरेगा, जहां यह जयपुर रिंग रोड (Jaipur Ring Road) और फागी-दूदू क्षेत्र को टच करेगा। इसके बाद यह टोंक और दौसा जिले के कुछ हिस्सों को कवर करते हुए आगे बढ़ेगा।
- अंतिम पड़ाव: इसका अंतिम छोर भरतपुर होगा, जहां यह उत्तर प्रदेश सीमा और आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे के पास कनेक्ट होगा।
किन जिलों को मिलेगा फायदा?
इस एक्सप्रेसवे के बनने से राजस्थान के 4 से 5 बड़े जिलों को सीधा फायदा होगा:
- अजमेर (ब्यावर): मारवाड़ से आने वाले वाहन सीधे इस रोड पर चढ़ सकेंगे।
- जयपुर (ग्रामीण): दूदू, फागी और चाकसू तहसील के गांवों को कनेक्टिविटी मिलेगी।
- टोंक: मालपुरा और टोंक के कुछ हिस्सों से यह गुजरेगा।
- दौसा: लालसोट और बांदीकुई के आसपास के क्षेत्रों को फायदा होगा।
- भरतपुर: ब्रज क्षेत्र और आगरा जाने वाले पर्यटकों के लिए राह आसान होगी।
दूरी और समय की बचत
वर्तमान में ब्यावर से भरतपुर जाने के लिए वाहनों को अजमेर शहर और जयपुर के भारी ट्रैफिक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें 6 से 7 घंटे का समय लगता है। इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने के बाद:
- यह सफर घटकर मात्र 3.5 से 4 घंटे का रह जाएगा।
- जयपुर शहर के अंदर का ट्रैफिक दबाव कम होगा।
- जोधपुर से आगरा जाने वाले टूरिस्ट बिना जयपुर शहर में फंसे सीधे निकल सकेंगे।
ताजा अपडेट
दिसंबर 2025 तक की स्थिति के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कई जगहों पर मुआवजे का वितरण शुरू हो चुका है और डीपीआर (DPR) के अनुसार एलाइनमेंट फिक्स कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 की शुरुआत में इसका निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो जाएगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह दौसा के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को क्रॉस करेगा। इससे ब्यावर और अजमेर के लोग आसानी से दिल्ली या मुंबई की तरफ डायवर्ट हो सकेंगे।
जमीन की कीमतों में उछाल
एक्सप्रेसवे के रूट के आसपास आने वाले गांवों (विशेषकर जयपुर और दौसा जिले में) में अभी से जमीन की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। लॉजिस्टिक हब और वेयरहाउसिंग के लिए यह रूट भविष्य में सोने की खान साबित हो सकता है।