राजस्थान में सर्दी ने अब अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू (Mount Abu) में ठंड ने ऐसा कहर बरपाया है कि लोग कांप उठे हैं। बीती रात यहां का तापमान लुढ़ककर 0 डिग्री सेल्सियस (0°C) पर पहुंच गया, जिसने पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
गाड़ियों और मैदानों पर जमी बर्फ की परत (Frozen Dew)
माउंट आबू में हालात ऐसे हैं कि सुबह के समय घर के बाहर खड़ी गाड़ियों की छतों, पेड़-पौधों की पत्तियों और खुले मैदानों में बर्फ की सफेद चादर (Frost) जमी हुई देखी गई। सैलानियों के लिए यह नजारा किसी जन्नत से कम नहीं है, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए यह ‘हाड़ कंपाने वाली’ सर्दी मुसीबत बन गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, नवंबर के महीने में इतना कम तापमान साल 2010 के बाद पहली बार दर्ज किया गया है। 2010 में भी नवंबर के अंतिम सप्ताह में पारा शून्य के करीब पहुंचा था।
पूरे राजस्थान में ‘कोल्ड अटैक’ (Cold Wave Grip)
सिर्फ माउंट आबू ही नहीं, बल्कि पूरा राजस्थान शीतलहर की चपेट में है।
- चूरू (Churu): शेखावाटी के चूरू में न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री दर्ज किया गया।
- सीकर (Sikar): फतेहपुर में तापमान 4 डिग्री के आसपास बना हुआ है।
- जयपुर (Jaipur): राजधानी में ठंडी हवाओं के चलते रात का तापमान 10 डिग्री तक नीचे आ गया है, जिससे सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई।
IMD की पूरे हफ्ते की भविष्यवाणी (Weekly Forecast)
मौसम विभाग केंद्र जयपुर (IMD Jaipur) ने आने वाले सप्ताह के लिए चेतावनी जारी की है:
- तापमान में और गिरावट: अगले 3 से 4 दिनों तक उत्तर भारत से आने वाली बर्फीली हवाएं (Northerly Winds) सक्रिय रहेंगी। इससे रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री की और गिरावट आ सकती है।
- माइनस में जा सकता है पारा: मौसम विभाग ने आशंका जताई है कि अगर हवा की रफ्तार यही रही, तो अगले 48 घंटों में माउंट आबू और जोबनेर में पारा माइनस (-1°C) में जा सकता है।
- घना कोहरा (Dense Fog): श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर और भरतपुर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रहने का अनुमान है। वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सैलानियों की बल्ले-बल्ले, किसान खुश
माउंट आबू में 0 डिग्री तापमान होने की खबर मिलते ही पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगी है। लोग इस ‘मिमी कश्मीर’ का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। वहीं, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कड़ाके की ठंड गेहूं, चना और सरसों की फसल के लिए बेहद फायदेमंद (Beneficial for Crops) साबित होगी, जिससे बंपर पैदावार की उम्मीद है।